विक्षनरी:तुकान्त शब्दकोश

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यह तुकान्त शब्दकोश तुकान्त कविता रचने में बहुत उपयोगी साबित हो सकता है। इसमें वर्तनी की कुछ गलतियाँ मौजूद हैं। इसके निर्माण के लिये प्रयोग किये गये साफ़्टवेयर की असमर्थता के कारण यह देवनागरी के वर्णक्रम के अनुसार प्रतिलोम क्रम में नहीं बनायी गयी है, बल्कि रोमन वर्णक्रम के अनुसार प्रतिलोम क्रम में सजी है।
आशा है भविष्य में इसे देवनागरी वर्णक्रम के अनुसार प्रतिलोम क्रम में सजाने में सफलता मिलेगी। भविष्य में इसे और भी वर्तनी- शुद्ध तथा अधिक शब्दों वाला बनाया जायेगा।
उधारण-सोहतहै चंदवा सिर मोर कौ ,तैसिहि सुंदर पाग कसी है ।
तैसिहि गो-रज भाल विराजत ,जैसी हिय वनमाल लसी है ।
रसखान विलोकत बौरी भई ,दृग मूँद के ग्वारि पुकार हँसी है ।
खोलौ री घूँघट ,खोलौं कहा? वह मूरत नैनन मॉंझ बसी है ।
इसमें सी शब्द तुकॉंत है ।